पर्यावरणिय विनिमय और कोविड-19 के बाद आर्थिक तंगहाली से उबार

24 मार्च 2020 को केन्द्र सरकार ने भारत भर में लाकडाउन की घोषणा कर दी ताकि एक्यूट रेसपिरेटोरी सिन्ड्रोम कोरोनावाईरस 2 (severe acute respiratory syndrome coronavirus 2 (SARS-CoV-2)) से उपजने वाले कोरोनावाईरस के नए रुप कोविड-19 (novel coronavirus disease (COVID-19)) बिमारी को भारत में फैलने से रोका जा सके। राज्य द्वारा सामाजिक और आर्थिक सहयोग दिए जाने के अभाव में लाकडाउन काफी कठोर साबित हुआ, हालांकि सामाजिक-स्वास्थ्य की दृष्टी से यह अहम था। पहले से चरमराई अर्थव्यवस्था को इस  विश्व्यापी महामारी के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ा। इससे अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर होनेवाले विभिन्न प्रकार के माल के व्यापार लगभग बंद हो गए। इसके कारण लाखों मघ्यम व लघु उद्योग और सेवाप्रदाता उद्यम बंद हो गए। इसके साथ-साथ असंगठित और दिहाड़ी मजदूर अचानक बेरोजगार हो गए। दूसरी तरफ, पर्यावरण में काफी तबदीलियां भी आईं जैसे कि प्रदूषित शहरों में ताज़ी हवा का बहना, नदियों का बहना और पक्षियों और पशुओं का वापस अपने उजड़े ठौर-ठिकाने पर वापस लौट जाना। औद्योगिकरण और शहरी इलाकों में होने वाले निमार्ण-कार्य का प्रभाव पर्यावरणिय प्रदूषण बढ़ाने में किस हद तक योगदान देता है, यह बात कोविड-19 के दौरान हुई लाकडाउन के दौरान पर्यावरण में जो तबदीली देखी गई उसी से समझ में आती है।
Gender and Digitisation in Asia

Gender and Digitisation in Asia: Future Policy Pathways

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To ensure that the fourth industrial revolution realises its transformative potential instead of exacerbating and creating new gender inequalities, it is important to understand the many intersections of digitisation and gender from a policy perspective. This paper examines the gendered dimensions of ICT in Asian countries, particularly South Asia and Southeast Asia/ASEAN.